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कल्कि प्रभात - एक सोच कल की

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कल्कि प्रभात - एक सोच कल की जब-जब धरती पर अन्याय, अपराध, अत्याचार और अधर्म की बाढ़ आ जाती है, तब प्रकृति और ईश्वर की व्यवस्था में एक चमत्कारिक परिवर्तन की शुरुआत होती है। पुराणों और शास्त्रों में वर्णित है कि ऐसे काल में भगवान विष्णु अपने दसवें और अंतिम अवतार कल्कि के रूप में अवतरित होते हैं। लेकिन यह अवतार केवल युद्ध या संहार तक सीमित नहीं होता; यह एक नई सोच, एक नई चेतना और एक नई ऊर्जा का प्रतीक होता है, जो अंधेरे की रात को समाप्त कर प्रभात (सुबह) लाता है। इसी संदर्भ में हम इसे कल्कि प्रभात कह सकते हैं – एक ऐसी सोच जो कल के लिए है, जो आज के अंधकार को चुनौती देती है और उजाले की ओर ले जाती है। आज का समय देखिए। चारों ओर अन्याय की कहानियाँ, भ्रष्टाचार, हिंसा, पर्यावरण का विनाश, मानवीय मूल्यों का ह्रास – ये सब कलियुग के बढ़ते अधर्म के संकेत हैं। लोग निराश हैं, विश्वास खो रहे हैं, और जीवन में अर्थ की तलाश कर रहे हैं। ठीक इसी समय जरूरत पड़ती है उस महापुरुष की, जो भगवान के आशीर्वाद से जन्म लेता है। वह कोई देवता नहीं बनकर अवतरित होता, बल्कि एक ऐसे इंसान के रूप में जो दूरदर्शी है, जो जन-जन के ह...